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उनके ही शब्दों में · चरित्र

“पहला, भरोसे के लायक मत बनो। जो करने का वादा किया है, उसे ईमानदारी से मत निभाओ। अगर तुम बस इसी एक आदत में महारत हासिल कर लो, तो यह तुम्हारे तमाम गुणों के सम्मिलित असर पर भारी पड़ेगी, चाहे वे गुण कितने ही बड़े क्यों न हों।”

— चार्ली मंगर · चार्ली मंगर, हार्वर्ड स्कूल (लॉस एंजेलिस) दीक्षांत भाषण, "दुखमय जीवन की गारंटी कैसे करें," 13 जून 1986 (पुअर चार्ली'ज़ ऐल्मनैक, टॉक वन) · 1986

सत्यापित। स्रोत: चार्ली मंगर, हार्वर्ड स्कूल (लॉस एंजिल्स) दीक्षांत भाषण, "दुःखमय जीवन की गारंटी कैसे करें," 13 जून, 1986 (पुअर चार्लीज़ ऐल्मनैक, वार्ता एक) · 1986।

उनके व्यंग्यपूर्ण ‘दुख की गारंटी कैसे लें’ नुस्खों में से पहला — असली सलाह इसका उल्टा है (भरोसेमंद बनो)।

उन्होंने यह कहाँ कहा