उनके ही शब्दों में · प्रसन्नता
“सुखी जीवन का पहला नियम है—कम अपेक्षाएँ। अगर आपकी अपेक्षाएँ अव्यावहारिक हैं, तो आप जीवन भर दुखी रहेंगे। अपेक्षाएँ वाजिब रखिए और जीवन जो नतीजे दे—अच्छे हों या बुरे—उन्हें कुछ हद तक स्थितप्रज्ञता के साथ जस का तस स्वीकार कीजिए।”
— चार्ली मंगर · डेली जर्नल वार्षिक बैठक, 2019 · 2019
सत्यापित। स्रोत: डेली जर्नल वार्षिक बैठक, 2019 · 2019।